7-tips-Improves-your habits-just-as-time-goes-on-in-hindi


१-आपनी कमजोरियों को किसीको ना बतायें.
मनुष्य की सबसे बड़ा दुर्बलता क्या होती है सोचिये.धन,प्रेम,अहंकार ऐ सब कुछ नेही है.मनुष्य की सबसे बड़ा दुर्बलता होती है उसकी रहस्य.चाहें आप कितनी भी शक्तिशाली क्यूं ना हो,कितनी भी प्रबल न क्यूं हो ,उसकी रहस्य उसका नाश की चाबी होती है.इस्सिलिये यदि प्रबल रहेना है,शक्तिशाली रहेना है तो आपनी रहस्य को किसीको भी ना बतायें.ना मितोंको नाही सतुको,क्यूं की समय पड़ने पर कब कोन सत्रु हो जाए एशा कहेना संभब नेही है.बिभिसन को राबन के अम्ब्रुत पुंज का ज्ञान्त था.इस्सिलिये प्रभु श्रीराम राबन का वध करने मैं सफल हो सके.इस्सिलिये उचित एही है की आप आपना रहस्य को आपने तक सिमित रखे .

२-किसीका मजाक ना उडाये.
मनुष्य भी बड़ा बिचित्र प्राणी है.आपनो से नीचेकी स्तर की लोगोंको वो हेय दृष्टी से देखती है.उनका उपहास उड़ाती है.उनसे बार बार कहेता है की तुम्हारा कुछ नेही हो सकता है.तुम भाबिस्य मैं कुछ नेही कर पाओगी.जब मनुष्य की पास धन,सम्पति,मन होता है तो वो दुसरोंका आदर नेही करता है.परन्तु वो एक बात भूल जाता है की उससे भी अधिक शक्तिशाली अस्तित्वो मैं है वो है समय काल चक्र.काल आपना चक्र कब बदलेगा ऐ कोई नेही जानता है.समय आपनी करबट कब लेगी ऐ कोई नेही जानता है.कोइला भी समय की साथ साथ हिरा मैं बदल जाती है.इस्सिलिये जीबन मैं कभी भी किसीकोभी उपहास नेही करेंगे.

३-अन्याय के आगे नेही झुकना.
कभी कभी आप सबकी जीबन मैं एशि बिचित्र समस्या अबस्य अति है की शक्तिशाली की सामने मोन हो जाते हो.शक्तिशाली से बिबाद करनेसे बचने केलिए आप मोन रेहे जाते हो.मानता हूँ एशा करनेसे आप एक बिबाद से बच जाते हैं.परन्तु एशा बचाओ एक बड़े संघर्ष को जन्म देता है.एशे हमारी मोन रेहेना,अनजाने मैं उसका समर्थन बन जाता है.और आपने को बोहोत शक्तिशाली महेसुस करता है.और एन्हा से हमारी दमन प्रारंभ हो जाता है.एक की बाद एक हम अन्याय मैं अन्चाहें रूप से सम्लित हो जाते हैं.तो इसका तोड़ क्या हे ऐ समझाने केलिए ऐ जानना आबस्यक है ,की एसी कोनसी बात है आप को बिरोध करने से रोकती है.ऐ सामने बाले की शक्ति नेही है जो आप को रोकती है.ऐ अप्प का छिपा भय है जो आप को रोकती है.हाँ कभी कभी भय आप की सुरक्ष्या अबस्य कर सकती है परन्तु साथ साथ ऐ भी जानना आबस्यक है,की ऐ भय ही है जो आप को मोन भी रखती है.इस्सलिये आप की मन से भय को निकाल दीजिए.और खुलकर अनीति का,अन्याय का बिरोध कीजिए.फिर देखेंगेआप का मन कितना मुक्त ,कितना हल्का अनुभब करेगा.

४-नक़ल न करना.
मनुष्य जीबन की परिक्ष्या मैं सफल होने केलिए क्या नेही करता.वो परिश्रम करता है,दौड़ भाग करता है,और ऐ सब करने की पश्चात भी जब उसीकी काम नेही बनता है तो वो नक़ल करता है.हेना तनिक लौटिए आपनी बचपन मैं.स्मरण कीजिए आपनी बचपन की स्मुर्तिओंका.क्या स्मरण हुआ.बिद्यालय मैं जब आप परिक्ष्या देने जाते थे तो क्या होता था,आप ना सेही,परन्तु कोई ना कोई सफलता पाने केलिए नक़ल करता ही था.और उतीर्ण भी होता था.हेना परन्तु जीबन की परिक्ष्या एशि नेही होती.नक़ल करने बाले कभी सफल नेही होते हैं कारन,बिद्यालय मैं सबकी प्रस्नपत्र एक होते थे परन्तु जीबन की प्रस्नपत्र और उनकी कठिनाए सब केलिए भिर्न होता है.तो निशित रूप मैं उत्तर भी भिर्न होगा ना.इस्सलिये यदि आपको जीबन मैं सफलता पाने है तो कभी भी नक़ल ना कीजिए.सोयं की प्रश्न का उत्तर सोयं खोज लीजिए और सफलता आप की ही होगी.

५-ज्यादा बोलना नुकसान दायक साबित हो सकता है
हमारा सरीर प्रकृति का एक महान अबिस्कार है.इसीसे जटिल संग्रचना संसार मैं और कोई नेही.हमारा सरीर जितना जटिल है,यदि एशे ठीक से जानना चाहेते  तो इस से अधिक सरल ज्ञान देने बाला कोई नेही है.हमारी सरीर मैं पंच इन्द्रिय होते है.जो हमें गुण ,भाव,और बस्तु का बोध कराती है.हमारी पास आंखे,नाक है स्पर्स केलिए त्वचा है,कान है,और जिव्हा है.सबका भिर्न भिर्न कार्य है.आंखो से देखना,कानो से सुनना,नथनो से स्वास लेना,त्वचा से स्पर्स करना और जिव्हा से स्वाद लेना.परन्तु आपने कभी सोचा है की प्रकृति ने हमें दो आंखे दी ,दो नथनो दी,दो कान दिया,स्पर्स केलिए एक पूरा सरीर दिया एसे क्यूं, क्यूंकि प्रकृति चाहती है की हम देखे अधिक,सुने अधिक और ज्ञान अधिक अर्जित करे,बोले कम.जो अधिकी बाचाल है वो नाश को निमत्रण देती है.स्मरण रखेय्गा.

६-अहंकार मत करना,
अहंकार एसी एक चीज है की मनुष्य को होर रोज खाए जा रहा है.अहंकार मैं मग्न हो के वो दुसरोंको सन्मान नेही देती है.कुछ थोड़ी सी सफल हासल कर लेने से वो समझता हे की वो दुनिया की सबसे बड़ी महान आदमी है.वो अंत मैं भगबान को भी पीछे छोड़ देती है.उसका दिमाक उसी टाइम कुछ समझ ने केलिए तेयार नेही होता है.अहंकार करने बाले कभी सफल नेही होते हैं ऐ आप अछी तरीका से जानते हैं.आप देख ली जिए द्वापर,त्रेतेया युग मैं इस अहंकार की बजेशे समस्त कुरु कुल और लंका भस्म हो गया था.अहंकार को नियत्रण करना बहोत जरुरी है.नेही तो आप का परिबार भी आप को पीछे छोड़ के चले जायंगे और दुनिया  मैं आप का कोई भी सन्मान नेही देगा.अंहकार की बजेशे आप कभी सुखी नेही रेहे पायंगे.तो जितना हो सकता है आप अहंकार को आपनी मन से छोड़ कर समाज के साथ लीन हो जाए.

७-सच को ना छुपाए.
जब सागर का जल बास्प बन कर उड़ता है तब वो हमें दिखाई नेही देता है.मेघ उस जल को आपनी भीतर छिपा लेता है.लम्बी यात्रा करती है.प्रयाश करती है की वो जल सदा उनकी भीतर छिपा रहे.परन्तु जब बायु का बेग उन्हें उड़ा कर के किसी परबत से ले जाकर के टकरा देता है तब उन मेघो का बरसना ही पड़ता है.क्यूं की एही नियति है.एही प्रकृति है.क्यूं की जल को सागर मैं जा करके मिलिना है.ठीक एसे हिं हम सत्य को आपनी मन की मेघो मैं चाहे जितना छुपाने का प्रयास करे परन्तु समय की आंधी उसे बास्तबिक की परबत से ले जाकर के टकर कर हमारी सामने ले ही आती है.जिश भय की कारन आप सत्य को सामने नेही लेकर आना चाहेते थे एक दिन वोही भय हमारी सामने आकर खड़ा हो जाता है.क्यूं की हमने उस भय को सामने करनेकी तेयारी नेही की होती है.इस्सलिये सत्य से भागे नेही.छुपाए नेही,उसे सिक्वार करे.आगे जा कर के बड़ी बिपति से बच जाएँगी.

                                                                   Thanks
                                                                                                                       Er.swarupananda sahoo

































7-tips-Improves-your habits-just-as-time-goes-on-in-hindi 7-tips-Improves-your habits-just-as-time-goes-on-in-hindi Reviewed by guru on November 29, 2018 Rating: 5

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